रविवार, 26 जुलाई 2020

Adivasi meaning in Hindi Detailed। आदिवासी का अर्थ विस्तृत जानकारी हिंदी में


Adivasi meaning in Hindi Detailed:

आदिवासी शब्द का अर्थ(Adivasi word meaning) क्या होता है ? उसकी व्याख्या क्या हो सकती है?

आदिवासी, शब्द और आदिवासियों का अर्थ, भारतीय समाज में जंगल में रहने वाले वनवासी ऐसा होते हुआ आया है। जो की उसका गलत अर्थ है। आदिवासी शब्द का अर्थ नीचे दिया गया है। 

आदिवासी को देश की प्रथम जाती कहा गया है। मतलब जो जाती जिस देश में प्रथम स्थाई होती है उन्हें उस देश के आदिवासी कहा जाता है। 

आदिवासी का शाब्दिक अर्थ निकाले तो।
आदिवासी, शब्द दो शब्द से मिल के बना हुआ है।
1।आदि: यानी कि प्राचीन
2। वासी: यानी रहने वाला
यानी कि प्राचीन समय से रहने वाली जनजातियां। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक जजमेंट से कहा है कि, पहले द्रविडों को इस देश के मूलनिवासी बताया गया था। जो की गलत था, आज सुप्रीम कोर्ट का भी मानना है कि आदिवासी ही इस देश के मूलनिवासी है।

दुनिया में सबसे ज्यादा आदिवासीओ की आबादी अफ्रीका में पाए जाते है, माना जाता है कि दूसरे नंबर कि सबसे ज्यादा आदिवासी आबादी भारत में है। दुनिया में आदिवासियों को अगल अगल नाम से जाना जाता है। जैसे कि अंग्रेजी में Aboriginal (आदिवासी), primitiv (आदिम), प्राचीन (ancient), original inhabitants ( मूलनिवासी), native people (देशी लोग), Indigenous peoples(स्वदेशी लोग) जैसे शब्दों से नवाजा जाता है।

भारत में आदिवासियों को सांविधानिक रूप से शेड्यूल ट्राइब कहा गया है। जिसका अर्थ भारत के बंधारण की कलम 342 के अनुसार राष्ट्रपतिने प्रकट की हुए सूची में जिस आदिजातिओ के नाम का समावेश होता हो, उस आदिजाति को शेड्यूल ट्राइब कहा गया है। ।

Tribe(ट्राइब) : भारत में ट्राइब अर्थ "अलग अलग जाती और गोत्र के लोग के हर जुथ के एक एकम को ट्राइब कहा गया है"।

Note: Tribe का अर्थ आदिवासी नहीं होता।
भारत में आदिवासियों को शेड्यूल ट्राइब कहा जाता है। लेकिन सारे शेड्यूल ट्राइब आदिवासी नहीं है। अमुक जनजाति का जीवन आदिवासियों की तरह होने से उन्हें शेड्यूल ट्राइब का दर्ज़ा मिला है।

गुरुवार, 31 जनवरी 2019

Is Adivasi untouchable?


क्या आदिवासी (Adivasi) को untouchable (अस्पृश्यता ) कहना उचित है?:
दोस्तो कई कई बार कई जगहों पे आदिवासी को untouchable माना जाता है। या लोग मान लेते है। तो आज इस विषय पे थोड़ी बात रहेगी।

1। untouchability (अस्पृश्यता)क्या है?

भारत मे अस्पृश्यता का जन्म हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार हुआ है। हिन्दू धर्म मे पहले वर्ण व्यवस्था कर्म के आधार पे थी, उस टाइम में कोई भी आर्य अपने कर्म के अनुसार ब्रामण, क्षत्रिय,वैसीय, सुद्र बन सकता था। बाद में दूसरी जाती के साथ उनका सामाजिक व्यवहार होने लगा था। इसलिए आर्यो ने सोचा कि अगर हमे सब पे राज करना है तो अपनी वर्ण व्यवस्था फिक्स करनी पड़ेगी, इसलिए आर्योने आर्यो के अलावा जो जातीया और उनकी नाजाएत जाति थी उनको उन्हों ने उनतोउचबले कह दिया। जिससे कि वह उनपे राज कर सके उन्हें गुलाम बना सके, इसलिए उन्हों ने अस्पृश्यता जैसे कॉन्सेप् लगाए। और उनका सोसन किया।  जिससे की वह लोग हरबार के लिए दबे रहे। मज़े की बात तो यह है कि

वह लोग उनका बनाया अनाज इत्यादि खाते थे। लेकीन उन्हें छूना अपवित्र मानते थे।

2। क्या आदिवासी untouchable है?

नही!

आदिवासी को untouchable कहना या मानना बहोत गलत होगा। क्यो की आदिवासी इस देस के मूलनिवासी है। अगर कोई दूसरे देश का व्यक्ति हमारे देश मे आके हमे untouchable कहे ये किसी भी तरह से उचित नही है। हम लोग उन्हें कह सकते है, लेकिन आदिवासी कभी भी ऐसा घमंड करता या दिखता नही है।

किसीभी पौराणिक ब्रामण ग्रंथ में भी आदिवासी को अछुत कहा गया हो। वैसा कोई प्रमाण अवेलबल नही है। बल्कि हम उनकी वर्ण व्यवस्था में ही सामील किये गए नही थे।

यह पोस्ट लिखने का उदेसिय यही हैं, की सभी आदिवासी भाई बहन अपने को अछुत ना समझे और फूल कॉन्फिडेंस के साथ रहे और जीवन मे खुशी समृद्धि और प्रगति प्राप्त करे।


शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2016

Adivasi Fashion Show held in Delhi .

मिशन 2018 दिल्ली चलो"
नई सोच नई उड़ान
|| देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित हुआ पहला आदिवासी फैशन शो आदिवासी छात्रो ने मचाई रैम्प पर धमाल ....नेशनल जयस ||
दिल्ली में आयोजित हुआ देश का पहला आदिवासी फैशन शो जिसकाअ मकसद देश के आदिवासिओ की संस्कृति और परम्पराओं को संरक्षित करने के लिए नई पीड़ी के लिए को प्रेरित करना जिसमे बड़ी संख्या में आदिवासी छात्र छात्राओँ ने भाग लेकर अपने जलवे बिखेर कर आदिवासी संस्कृति की झलक पेस की इससे प्रेरित होकर आने वाले समय में मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले आलीराजपुर में भी आदिवासिओ की संस्कृति और परम्पराओं को संरक्षित करने के लिए प्रदेश के पहला आदिवासी फैशन शो आयोजित करेगे जिसमे आदिवासी युवा अपनी पारम्परिक वेश भूषा और धनुष बाण के साथ रैम्प पर अपने जलवे बिखेरेंगे जिसका मकसद आदिवासिओ को अपनी संस्कृति और परम्पराओं को बढ़ावा देने के साथ साथ संविधान की पाँचवी अनुसूची को लागू करवाने के लिए मिशन 2018 दिल्ली चलो का तूफानी प्रचार प्रसार करना भी रहेगा ताकि आदिवासिओ को अपनी संस्कृति और रितिरिवाजो के साथ साथ अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक कर अपने अस्तित्व को बचाने की खातिर आगे आने के लिए प्रेरित करना भी है .....डॉ हिरा अलावा जयस
नेशनल जयस संरक्षक नई दिल्ली
जय आदिवासी युवा शक्ति





सोमवार, 21 सितंबर 2015

Who is Adivasi? and why Proud to be an Adivasi

Who is Adivasi/ आदिवासी कौन है?

  • सबसे पहले तो ये बता दू कीआदिवासी कोइ जाति या कोइ घर्म नहि है। आदिवासी उन जातियों का समूह है जो भारत में अनादि काल से वास कर रहे है। जैसे की मुंडा,गरासिया,भील,वारली, भिलाला इत्यादि आदिमजाति के समूह को "आदिवासी" कहाँ जाता है।

"आदिवासी" शब्द क्या है ?


  • आदिवासी शब्द आदि+ वासी दो शब्दो का बना है जिसका अर्थ "अनादि काल से "+ "भौगोलिक स्थान पे वास करनेवाला व्यक्ति, समूदाय" = मूलवासी/ आदिवासी एसा होता है।
  • आज आदिवासीयों के कही नाम है जो लोगोनें अपने "राजनैतिक" फायदो के लिये दिये है जैसे की वनवासी, वनबंघु, जंगली, मूलनिवासी, गिरीजन, बर्बर, एबोरिजनल, जनजाति है।
  • आदिवासीयों का संविघानिक नाम "अनुसुचित जनजाति (Schedule Tribe) ST" है। (लेकीन , हर अनुसूचित जननति आदिवासी नहीं है। )
  • आज हम आदिवासी का प्रतिबिंबित दश्य चोर, लूटेरा, अघनंगा मनुष्य की तरह लेते है क्योकि TV_मिडीया चेनलो और फिल्मो मे हमे एसे ही दर्शाया जाता है।

तो आदिवासी  है कोन ??


  • आज कुछ लोग अपने आदिवासी होने की पहेचान छुपाते है और वो "कुछ" लोग शहर मे पढाइ एवं नोकरी कर रहे व्यक्ति है। क्योकि उनकी मानसिकता में आदिवासी चोर  लूंटेरा अघनंगा अँघश्रद्दा में माननेंवाला इंसान होता है। जो सिर्फ लोगो की  सोच है ।
  • सहि मे आदिवासी "कुदरती इंसान" है जिसका महत्व युनो (UNO) ने दिया है। क्योकि आदिवासी "प्रकृति रक्षक" है और L.R.R. 1972 की P.No. 419 में आदिवासीयो का उल्लेख "नेचरल कोम्युनिटी" के नाम से किया गया है।
  • हमें गर्व होना चाहिये की हम आदिवासी है।
  • हम भारत के आदिवासी भारत देश के मालिक है।
  • आदिवासी का उल्लेख रामायण_महाभारत, बाइबल, कुरान में भी है।अत: ये दस्तावेजी साबित भी हो गया है की आदिवासी A/C Ante Christ (इसु ख्रिस्त) पहले का Nonjudicial "कुदरती समूदाय" है।
  • आज भारत में तकरिंबन १४-१५ करोंड आदिवासी है।जो अलग-अलग भौगोलिक स्थान में अपनी अलग-अलग रित-रिवाज, व्यवहार, बोली(भाषा-नोघ:आदिवासीयो की कोइ लिपी नहि है) संस्कृति के साथ जी रहे है।
  • आदिवासी घर्मपूर्वी है। आदिवासी ए/सी Ante Christ है।
  • आदिवासीयों का इतिहास में अतिमहत्वपूर्ण भाग रहा है।और आदिवासीयों की गणना एक "कुदरती" "सच्चे" "व्यवहारिक" और "लड़ायक" कोंम में होती है।हमें गर्व है की हम आदिवासी है।
  • कुछ लोग शर्माते है है खुद को आदिवासी कहनें से,और शर्मानेंवालें ज्यादातर लोग वो है जो आरक्षण का फायदा लेकर शहरो में सरकारी पदो पें फर्ज बजा रहे है और जो आदिवासी युवा पढाइ कें लियें शहरो में गयें है।
  • वो खुद को “आदिवासी” कहनें मे शर्माते है क्योकि वो दूसरी संस्कृति को “आदिवासी सभ्यता” सें बड़ा मानते है और आदिवासी को अघनंगा,चोर-लूटेरा, जंगली होने की कल्पना करते है।
  • जबतक हमारें लोग अपनी आदिवासी सस्कृति,व्यवहार और सभ्यता को नहि जानेंगे तबतक वो खुद को आदिवासी कहनें सें शर्मायेंगे। आदिवासी संस्कृति, सभ्यता और व्यवहार सभी घर्मो सें बढ़कर है।
  • पहले खुद को समजो बाद में अपनें आदिवासी होने पे गर्व करो,जबतक आप आदिवासी क्या है यें समजोगें ही नहि तबतक आप अपनें आप पें “गर्व” नहि कर सकोगे क्योकी आपकी नजर में आदिवासी अर्थ जैसे फिलमो में दिखाते है वैसा हिप-हिप-हुर्रे, झींगालाला हो हो, झींगालाला हो हो, अघनंगे, चोर-लूटेरे, जंगली, इँसान को खानेवाला ही है,

में खुदको आदिवासी होने पे गर्व करता हु क्योकि!


  1. हम इस देश के मालिक है और सदियों सें इस देश में निवास करते है। आदिवासी का अर्थ ही कीसी भौगोलिक स्थान पें अनादि काल सें निवास करना है और में वो आदिवासी हु जो भारत में सदियों से रह रहा हु,भारत देश का मालिक हूं ।
  2. UNO नें कीसी घर्म या जाति विषेश को छोड कें सिर्फ आदिवासीयों के विकास एवं रक्षा कें लियें ९ अगस्त(9 August) “विश्व आदिवासी दिवस(World Aboriginal Day)” जाहिर किया है
  3. आदिवासी समाज में स्त्री(महिला) की इज्जत की जाती है,और उसें पुरुष कें बराबर का हक दिया जाता है।
  4. आदिवासी व्यवहार प्रेम का व्यवहार है, यहाँ कीसी कें खानें-पीनें, दूघ आदि कुदरती संपत्ति के पैसे(Charge) नहि है। 
  5. क्षत्रिय अगर खुद कें राज- रज़वाडो पें गर्व करतें है तो इसकी वज़ह सिर्फ और सिर्फ आदिवासी है अगर आदिवासी जंगलों में मुघल एवं दूसरें दूश्मनो के हमलें का जवाब नहि देता तो आज क्षत्रियो का नामोनिशान नहि होता, और आज भी गुजरात और राजस्थान के राष्ट्रचिन्ह में एक और क्षत्रिय तो दूसरी ओर भील है,
  6. आदिवासीनें आजतक कीसी की गुलामी नहि की और वो जितना सहनशील होता है उतना ही खुंखाऱ होता है।
  7. आदिवासी रित-रिवाज एक दूसरें की सहायता के लियें बने हुवें है।
  8.  कभी कीसी आदिवासी कें माता-पिता कीसी वृद्दाश्रम में नहि दिखेंगे क्योकी आदिवासीयों के लियें माता-पिता सर्जनहार है। मुझे गर्व है की में आदिवासी हु।
  9. .एकलव्य जैसा वीर स्वयंगुरु आदिवासी है।
  10. हमें गर्व है की हम  बिरसा दादा, जयपाल सिंह  मुंडा , जैसे महान लोगो  के  वंसज  है। 

शनिवार, 29 अगस्त 2015

Who is Adivasi?

  1. आदिवासी कभी भी किसि का गुलाम नही रहा है, मित्रो । 
  2. आजादी या ( बंधारण) के पहले से ही हमने अंग्रेजों से लोहे लिये थे,लडाइया लडी थी,हमारे कितने लोग शहीद हो गए जैसे कि बिरसा मुंडा,टाट्या मामा,मानगढ के १५०७ भिल शहीद और कइ सारे.
  3. इसीलिये अंग्रेज कभी भी हमे हरा नही पाए थे । जबकि आप सब का मेरिट कम ०% होने के कारण आप अंग्रेजो के सामने टिक ही नही पाये थे. 
  4. आप तो हार गये थे और गुलाम बन गये थे. अरे आरक्षण विरोधी अंधो - हमने यहाँ ,उसी वक्त उन अंग्रेजो से हमारा १०० % मेरिट साबित कर दिया था.जिसके परिणाम स्वरूप हुए समझौतो के कारण अंग्रेजो से हमने आझादी से पहले ही विशेषाधिकार प्राप्त कर लिए थे ।
  5.  जिनको बोलते है " RIGHT OF SELF GOVERNANCE " & "RIGHT OF OWNERSHIP" , NOT RESERVATION. ये तो आप सब ने मिलकर हमारे "सेल्फ गवर्नेंस" और " मालिकाना हक्क" को छिनकर हमे आरक्षण का टुकडा थमा दिया वरना हमे तो आज भी आप के साथ नही रहना है. क्योकि हम ८% आदिवासी ही इस देश के मुल मालिक है
  6. अगर आप को विश्वास नही होता है तो -हे, ९०% मेरिटवाले मुर्खो, सुप्रीम कोर्ट के जस्टीस काट्जु साहेब की टयुशनरखवालो, ताकि ४० % वालो के पैरो मे कही नाक न रगडनी पड जाए आप बुद्धिशालियोंको आनेवाले समय में-क्योकि आपके डी.एन.ए.की रिपोर्ट भी निकल चुकी है जो इस देश के मूल लोंगो (आदिवासियो) से नही पर कोइ और देश के लोंगो से मेल खाती है.जिस से आप का मुल वतन का पता चलता है ,और ये बात तो इतिहास में कुटकुटकर लिखी ही गइ है, कि आर्य लोग खैबरघाट के रस्ते से हो कर इस देश में (बाहर से) आये थे इसी लिये आप अगर सही में मेरिटोरियश हो तो शांति से बैठे रहो नही तो जैसे आये थे वैसे जाने कि भी नोबत आ सकती है.इससे ज्यादा आप ९०% वाले बुधिशालीयो को हम ४०% वाले भला क्या सलाह दे सकते है ???